अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना – आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, लाभ

भारत में समाज में जात-पात एवं साम-वर्गीय भेदभाव की जड़ें लंबे समय तक व्याप्त रही हैं। ऐसे में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा इसी समस्या के समाधान के लिए सामाजिक समरसता बढ़ाने तथा अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहित करने हेतु यह योजना लागू की गई है। इस लेख में हम अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना (Inter-Caste Marriage Incentive Grant Scheme) के उद्देश्य, पात्रता, लाभ, आवेदन प्रक्रिया, महत्वपूर्ण बिंदु तथा सावधानियों सहित पूरी जानकारी हिंदी में प्रस्तुत करेंगे।

1. योजना का परिचय

“अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना” एक ऐसा सामाजिक-कल्याणकारी कार्यक्रम है, जिसमे राज्य सरकार उन दम्पतियों को आर्थिक अनुदान प्रदान करती है जिन्होंने अंतरजातीय विवाह किया हो। उदाहरणस्वरूप, मध्य प्रदेश में इस योजना के अंतर्गत सामान्य जाति के युवक-युवतियों द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के युवक/युवती के साथ अंतर्जातीय विवाह करने पर रु 2 लाख की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।  इसी तरह बिहार में इस तरह की योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये तक की राशि दी गई है। 

इस प्रकार यह योजना सामाजिक समरसता, जात-प Rast्रवाद का उन्मूलन तथा विवाह के माध्यम से सामाजिक समानता स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

2. योजना का उद्देश्य

इस योजना के पीछे मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • जाति-वर्ग के भेदभाव एवं अंतर्वर्गीय विभाजन को कम करना।

  • समाज में अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा देना जिससे सामाजिक समरसता को बल मिले।

  • विवाह के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं निष्पक्षता के सिद्धांत को मजबूत करना।

  • आर्थिक सहायता देकर उन जोड़ों को राहत देना जिन्होंने सामाजिक धक्कों एवं विरोध-प्रथाओं के बावजूद अंतर्जातीय विवाह किया है।

    उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश सरकार ने कहा कि “योजना का उद्देश्य राज्य में सांप्रदायिक सद्-भाव को बढ़ावा देना और अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहित करना है।” 

3. योजना की विशेषताएँ

इस योजना की कुछ मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • विवाह के तुरंत बाद एवं/या विवाह के कुछ समय बाद अनुदान राशि देने का प्रावधान। उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश में विवाह के तुरंत बाद राशि का एक भाग सीधे जोड़ों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। 

  • पहली शादी का होना अनिवार्य। पहले से विवाहिता या विवाहिता-विवाहित जोड़ों को अक्सर लाभ नहीं मिलता। 

  • समुचित पंजीकरण एवं विवाह प्रमाणपत्र का होना। अक्सर हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के अंतर्गत विवाह पंजीकरण आवश्यक होता है। 

  • आवेदन आवेदन-अवधि: विवाह के बाद एक निश्चित अवधि के भीतर आवेदन करना आवश्यक। जैसे मध्य प्रदेश में विवाह के 1 वर्ष के भीतर दावा माना जाता है। 

  • लाभ की राशि राज्य तथा प्रावधानों के अनुरूप बदल सकती है — उदाहरण के लिए बिहार में 1 लाख रुपये की राशि का उल्लेख है। 

4. पात्रता मानदंड

योजना का लाभ लेने के लिए कुछ निर्धारित पात्रताएँ होती हैं, जो राज्य-विशिष्ट हो सकती हैं। सामान्यतः निम्न बातें देखी जाती हैं:

  1. विवाह हुआ होना चाहिए: जोड़ा अंतरजातीय विवाह करता हो — अर्थात् वर/वधू में से एक अनुसूचित जाति (या अनुसूचित जनजाति) वर्ग का सदस्य हो और दूसरा सामान्य अथवा अन्य वर्ग का हो। उदाहरण-स्वरूप, मध्य प्रदेश में यह विशिष्ट रूप से “सामान्य जाति के युवक-युवतियों द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के युवक/युवतियों के साथ” के संदर्भ में है। 

  2. निवासी/स्थायी नागरिकता: जोड़ों को उस राज्य के निवासी होना आवश्यक है जहाँ योजना लागू हो रही है। मध्‍य प्रदेश और बैतूल जिले में उदाहरणस्वरूप जिले का निवासी होनी चाहिए।

  3. पहली शादी: अधिकांश योजनाओं में लाभ तभी मिलता है जब यह जोड़ा पहली शादी कर रहा हो। 

  4. विवाह पंजीकरण: विवाह को कानूनी रूप से पंजीकृत करना आवश्यक होता है — जैसे हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत प्रमाणपत्र हो। 

  5. आयु सीमा एवं अन्य शर्तें: कुछ राज्यों में न्यूनतम आयु, आय-वर्ग अथवा वित्तीय स्थिति जैसी अतिरिक्त शर्तें होती हैं। उदाहरण के लिए बिहार में वधू की आयु कम-से-कम 18 वर्ष तथा वर की आयु 21 वर्ष होना आवश्यक है। 

5. लाभ एवं राशि

योजना के तहत मिलने वाला लाभ (अनुदान राशि) राज्य-अनुसार अलग-अलग हो सकता है। कुछ प्रमुख उदाहरण नीचे दिए गए हैं:

  • मध्य प्रदेश में जोड़ों को रु 2 लाख की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। 

  • बिहार राज्य में इस तरह की योजना के अंतर्गत रु 1 लाख तक की राशि का प्रावधान देखा गया है। 

  • समाचार लेखों में उल्लेख है कि इस तरह की योजनाओं में “ढाई लाख रुपये” तक की राशि मिलने की संभावना है। 

    लाभ की राशि मिलने की प्रक्रिया में कभी-कभी दो-चरणीय वितरण भी होता है — जैसे मध्य प्रदेश में आधी राशि विवाह के तुरंत बाद और शेष राशि एक वर्ष बाद दी जाती है। 

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6. आवेदन प्रक्रिया

यहाँ सामान्य प्रक्रिया दी जा रही है — राज्य-विशिष्ट विवरण हो सकते हैं, इसलिए संबंधित राज्य के विभागीय निर्देश अवश्य देखें।

  1. योग्य जोड़ों द्वारा विवाह के बाद निर्धारित अवधि (उदाहरण के लिए 1 वर्ष) के भीतर आवेदन करना होता है। 

  2. आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें — जैसे विवाह प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, आयु प्रमाणपत्र, बैंक खाता विवरण आदि। 

  3. संबंधित राज्य एवं जिले की सामाजिक न्याय, अनुसूचित जाति/जनजाति विकास या समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट/ऑफिस से आवेदन पत्र प्राप्त करें।

  4. आवेदन फॉर्म में व्यक्तिगत विवरण, विवाह की तिथि, दोनों पक्षों की जानकारी, बैंक खाता आदि भरें।

  5. दस्तावेज अपलोड/संलग्न करें और आवेदन जमा करें।

  6. आवेदन के सत्यापन के बाद स्वीकृति मिलने पर अनुदान राशि बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

  7. कुछ योजनाओं में राशि का एक हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट के माध्यम से लॉक-इन अवधि के बाद दे दिया जाता है। उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश में शेष राशि 1 वर्ष बाद दी जाती है। 

7. महत्वपूर्ण बिंदु एवं सुझाव

  • आवेदन करने से पहले योजना के लिए अंतिम तिथि, किसी-किसी राज्य में लॉक-इन अवधि और पहली शादी की शर्त आदि का अच्छे से अध्ययन करें।

  • विवाह पंजीकरण को अग्रिम रूप से सुनिश्चित करें ताकि आवेदन में ट्रबल न आए।

  • बैंक खाता दोनों का संयुक्त खाता हो तो सुविधाजनक रहता है, क्योंकि ज्यादातर योजनाओं में राशि संयुक्त खाते में दी जाती है। 

  • आवेदन समय से करें — कई जगह विवाह के 1 वर्ष के भीतर आवेदन जरूरी है। आवेदन में देर होने पर लाभ नहीं मिलता। 

  • यदि आवेदन के बाद राशि ट्रांसफर नहीं हुई हो, तो संबंधित विभाग से संपर्क करें एवं आवेदन की स्थिति देखें।

  • योजना का लाभ लेते समय यह समझ लें कि यह सामाजिक समरसता को उजागर करने के उद्देश्य से है — इसलिए विवाह को कानूनी व पारंपरिक रूप से उचित तरीके से करना आवश्यक है।

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8. चुनौतियाँ एवं विचारणीय पक्ष

  • कुछ प्रदेशों में यह देखा गया है कि लोगों को इस योजना के बारे में जानकारी कम प्राप्त होती है — इस कारण जोड़ों को लाभ नहीं मिल पाता।

  • सामाजिक-संस्कृतिक विरोध एवं परिवारिक दबावों के कारण अंतर्जातीय विवाह करना स्वयं में चुनौतिपूर्ण हो सकता है, और योजना के लाभार्थियों को सुरक्षा या सामाजिक स्वीकृति की समस्या हो सकती है।

  • योजना की राशि अलग-अलग राज्यों में बहुत भिन्न है — इससे लाभ की असमानता सामने आती है।

  • लॉक-इन अवधि व अन्य शर्तों के कारण कुछ जोड़ों को तत्काल लाभ नहीं मिल पाता।

9. निष्कर्ष

अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना सामाजिक रूप से अत्यंत प्रासंगिक है। यह केवल आर्थिक सहायता देने का माध्यम नहीं बल्कि यह संदेश देती है कि समाज में जात-वर्ग के आधार पर विभाजन को समाप्त किया जाना चाहिए और विवाह को सामाजिक समरसता के पुल के रूप में देखा जाना चाहिए। अपन े राज्यों में इस योजना का लाभ उठाने योग्य जोड़ों को चाहिए कि वे नियम-शर्तों के अनुरूप जल्दी से आवेदन करें।

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