बिहार राज्य में, किशोरियों — विशेषकर सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाली 7वीं से 12वीं तक की छात्राओं — के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को सुनिश्चित करने हेतु साल 2018 में यह योजना प्रारंभ की गयी।
इस योजना के मुख्य प्रेरक बिंदु हैं:
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मासिक या वार्षिक मासिकधर्म (पीरियड) के दौरान सैनिटरी नैपकिन-उपयोग और स्वच्छता सुनिश्चित करना।
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इस आयु वर्ग की पाठशाला छोड़ने (ड्रॉपआउट) दर को कम करना एवं विद्यालय में नियमित उपस्थिति बढ़ाना।
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स्वास्थ्य-संबंधित जागरूकता बढ़ाना, स्वच्छता व्यवहार एवं किशोरी-स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों पर जानकारी देना।
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वित्त-सहायता तथा सुविधा-उपकरण के माध्यम से किशोरियों के प्रति सामाजिक एवं शैक्षिक समर्थन सुनिश्चित करना।
उदाहरण के लिये, वर्ष 2023-24 में इस योजना के अंतर्गत कक्षा 7वीं से 12वीं की छात्राओं को सेनेटरी पैड हेतु लगभग ₹ 80 करोड़ 45 लाख 7 हजार 600 राशि प्रदान की गयी है।
उद्देश्य
इस योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
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किशोरियों के माहवारी-स्वच्छता (Menstrual Hygiene) की सुविधा सुनिश्चित करना — ताकि कपड़े/अन्य अस्वच्छ माध्यम के उपयोग से स्वास्थ्य-सम्बंधित जोखिम न हो।
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पाठशाला स्तर पर लड़कियों की निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करना एवं ड्रॉप-आउट दर को कम करना।
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स्वास्थ्य-शिक्षा (Health Education) के माध्यम से उन्हें स्व-देखभाल, स्वच्छता, पोषण आदि के प्रति जागरूक बनाना।
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बैंक खाते या अन्य माध्यम से निदेशित आर्थिक सहायता पहुँचाना, ताकि सुविधा-साधन आय-प्रतिबंधित परिवारों तक भी पहुँचें।
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सामाजिक समानता को बढ़ावा देना — विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली किशोरियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना।
ये उद्देश्य योजना को सिर्फ वित्त-सहायता तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उससे परे शिक्षा-स्वास्थ्य-स्वच्छता के समग्र विकास पर केंद्रित हैं।
पात्रता मानदंड
योजना की पात्रता निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है:
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किशोरी लड़की बिहार राज्य की मूल निवासी हो।
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उस लड़की को सरकारी विद्यालय (Government School) में कक्षा 7वीं से कक्षा 12वीं तक पढ़ना चाहिए।
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बैंक खाता होना/या अन्य पात्र बैंकिंग व्यवस्था होना आवश्यक है, क्योंकि राशि बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।
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आवेदन के समय आवश्यक दस्तावेज प्रदान करना जैसे: आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र, बैंक पासबुक की प्रति आदि।
इन मानदंडों के अनुरूप छात्रों को योजना का लाभ मिलता है।
लाभ एवं सहायता की राशि
इस योजना के अंतर्गत मिलने वाले प्रमुख लाभ निम्न हैं:
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प्रत्येक पात्र किशोरी के बैंक खाते में प्रति वर्ष ₹ 300 की धनराशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) माध्यम से जमा की जाती है।
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इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से सैनिटरी नैपकिन आदि स्वच्छता-उपकरण खरीदने हेतु प्रोत्साहन के रूप में किया जाना है।
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इस तरह, किशोरियों को उन्हें स्वच्छता के आवश्यक उत्पाद उपलब्ध करवाने का साधन मिलता है, जिससे उनकी शैक्षिक गतिविधियों में व्यवधान न हो।
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इसके अतिरिक्त योजना माध्यम से नियमित स्वास्थ्य-शिक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम विद्यालय स्तर पर चलाये जाते हैं, जिससे जीवन शैली, पोषण, स्व-देखभाल आदि पर असर होता है।
उल्लेखनीय है कि राशि का प्रयोजन सिर्फ तात्कालिक नहीं है — यह किशोरी की समग्र स्वास्थ्य एवं शिक्षा-सक्षम बनने की प्रक्रिया को समर्थन देता है।
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आवेदन प्रक्रिया
योजना का लाभ उठाने हेतु आवेदन की प्रक्रिया निम्नलिखित है:
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पात्र किशोरी को अपने स्कूल से योजना हेतु आवेदन पत्र प्राप्त करना होता है।
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आवेदन पत्र में आवश्यक जानकारी सही-सही भरनी होती है, जैसे: छात्रा का नाम, कक्षा, बैंक खाता संख्या, आधार संख्या, विद्यालय का नाम आदि।
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साथ में पात्रता प्रमाणपत्र एवं दस्तावेज जैसे: आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रथम पृष्ठ की प्रति, निवास प्रमाणपत्र इत्यादि संलग्न करना होता है।
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विद्यालय अथवा संबंधित विभाग द्वारा आवेदन की जांच-पड़ताल की जाती है। यदि सत्यापन सफल होता है, तो राशि बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।
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राशि के ट्रांसफर के बाद छात्रा को नियमित स्वास्थ्य-शिक्षा एवं स्वच्छता-सम्बंधित कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए ताकि योजना का लाभ सतत् रूप से सिद्ध हो सके।
यह प्रक्रिया सरल है, लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आवेदन सही समय पर और सही दस्तावेजों के साथ किया जाए।
उपलब्धियाँ एवं प्रभाव
योजना की शुरुआत से अब तक कुछ मुख्य उपलब्धियाँ निम्नलिखित रूप में सामने आई हैं:
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वर्ष 2023-24 में उक्त योजना के अंतर्गत कक्षा 7वीं से 12वीं तक की छात्राओं को लगभग ₹ 80 करोड़ 45 लाख 7 हजार 600 की राशि उपलब्ध कराई गयी है।
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इसके चलते मासिकधर्म (मासिक चक्र) सम्बन्धी स्वच्छता-उपकरण (सैनिटरी नैपकिन) की पहुँच बेहतर हुई है। उदाहरणस्वरूप, मीडिया रिपोर्ट में उल्लेख है कि यह राशि सेनेटरी नैपकिन खरीदने में इस्तेमाल की जा रही है।
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इससे विद्यालय लेवल पर लड़कियों की उपस्थिति में सुधार देखा गया है और ड्रॉप-आउट दर में कमी की दिशा में संकेत मिले हैं।
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सामाजिक जागरूकता बढ़ी है कि मासिकधर्म समय पर स्वच्छता की दृष्टि से साधन एवं जानकारी दोनों अहम हैं।
इन उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि योजना न केवल वित्त-सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि किशोरियों के समग्र स्वास्थ्य एवं शिक्षा-स्थिति को बेहतर बनाने में योगदान दे रही है।
चुनौतियाँ एवं सुधार-सुझाव
हालाँकि योजना ने appreciable लाभ दिए हैं, फिर भी कुछ चुनौतियाँ और सुधार के क्षेत्र विद्यमान हैं:
चुनौतियाँ
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बैंक खाता-अवस्थाएँ या बैंकिंग सुविधा-अभावित किशोरियों तक राशि पहुँचने में देरी।
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ग्रामीण, दूरदराज क्षेत्रों में विद्यालय-स्तर पर जानकारी एवं जागरूकता की कमी।
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मासिकधर्म स्वच्छता-उपकरण (सैनिटरी नैपकिन) की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित न होना।
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सामाजिक, मान-संस्कारात्मक कारणों से किशोरियों का स्वास्थ्य-संबंधित संवाद खुले तौर पर न हो पाना।
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आवेदन-प्रक्रिया में विद्यालय तथा विभागीय समन्वय की कमी से लाभार्थियों तक पहुँच में बाधा।
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सुधार-सुझाव
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प्रत्येक विद्यालय में स्वच्छता मित्र/स्वास्थ्य सहायक नियुक्त करना, जो मासिकधर्म स्वच्छता-प्रशिक्षण एवं उपकरण वितरण सुनिश्चित करें।
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बैंकिंग सुविधा-संपर्क (उदाहरण-चरित बैंक खाता खुलवाना, मोबाइल बैंकिंग जागरूकता) को बढ़ावा देना ताकि राशि समय पर लाभार्थियों को पहुंचे।
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मासिकधर्म स्वच्छता-उपकरण की नियमित आपूर्ति हेतु स्थानीय विक्रेताओं / स्वयं-सहायता समूहों को जोड़ना, जिससे ग्रामीण-क्षेत्र में पहुँच बेहतर हो सके।
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विद्यालय-स्तर पर मासिकधर्म एवं स्वास्थ्य-शिक्षा (Menstrual Hygiene Education) सत्र नियमित रूप से आयोजित करना, जिसमें माता-पिता एवं समुदाय का भी समावेश हो।
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योजना की मॉनिटरिंग एवं इवैल्यूएशन तंत्र को सुदृढ़ करना — लाभार्थियों का फॉलो-अप, उपयोग-स्थिति का सर्वेक्षण, सुधारात्मक कार्रवाई।
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विशेष रूप से ऐसे-क्षेत्रों में जहाँ ड्रॉप-आउट दर अधिक है, समुदाय-आधारित प्रेरणा-कार्यशालाएँ चलाना।
इस योजना का सामाजिक महत्व
“मुख्यमंत्री किशोरी स्वास्थ्य योजना” सिर्फ एक वित्त-सहायता योजना नहीं है — यह सामाजिक-परिवर्तन का वाहक है। इसके माध्यम से:
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किशोरियों को स्व-देखभाल एवं स्वच्छता के प्रति सशक्त बनाया जा रहा है।
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शिक्षा-क्षेत्र में लड़कियों की भागीदारी को बढ़ावा मिल रहा है।
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मासिकधर्म से जुड़ी सामाजिक संकोच-मान्यताओं को चुनौती मिलने लगी है।
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स्वास्थ्य-साक्षरता के स्तर में वृद्धि हो रही है — लड़कियाँ न केवल अपने स्वास्थ्य-प्रबंधन को बेहतर बना रही हैं, बल्कि परिवार एवं समाज को भी प्रेरित करती हैं।
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अन्ततः, यह महिलाओं-सशक्तिकरण की दिशा में एक आवश्यक कदम है — क्योंकि स्वस्थ, शिक्षित एवं स्वच्छता-सजग किशोरी आगे चलकर बेहतर नागरिक, बेहतर माता-और बेहतर समाज-सदस्य बनती है।
निष्कर्ष
यदि सारांश में कहें — “मुख्यमंत्री किशोरी स्वास्थ्य योजना” ने बिहार की किशोरियों के लिए एक सकारात्मक स्वास्थ्य-शिक्षा-सहायता मॉडल प्रस्तुत किया है। योजना ने वित्त-सहायता के माध्यम से स्वच्छता-उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित की है, साथ ही विद्यालय-उपस्थिति, स्वास्थ्य-जागरूकता एवं सामाजिक समानता में सुधार की दिशा में काम किया है।
हालाँकि चुनौतियाँ मौजूद हैं — बैंकिंग पहुँच, ग्रामीण जागरूकता, वितरण-सुनिश्चितता, सामाजिक बंधन आदि — लेकिन यदि सुझावों के अनुरूप स्थानीय स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाएँ, तो इस योजना का प्रभाव और व्यापक एवं दीर्घ-कालीन हो सकता है।